देश में मिलियनेयर की संख्या 19 साल में 7 गुना बढ़कर 3.5 लाख हुई, 2024 तक 5.35 लाख तक पहुंचने का अनुमान
मुंबई (कुमुद दास). भारत में वर्ष 2000 तक कुल 50,000 मिलियनेयर (10 लाख डॉलर नेटवर्थ) थे। पिछले साल तक इनकी संख्या 6.86 गुना बढ़कर करीब 3.43 लाख हो चुकी है। अगले पांच साल में इनकी संख्या 56% बढ़कर 5.35 लाख तक पहुंच जाने का अनुमान है। इसका एक अर्थ यह भी है कि भविष्य में इन्हें अपने धन को मैनेज करने के लिए पेशेवर व्यक्ति की जरूरत होगी। ऐसे में देश में और फैमिली ऑफिस खुलेंगे। वर्ष 2024 तक देश में 1,000 से ज्यादा फैमिली ऑफिस खुलने की संभावना है।
मल्टी-क्लाइंट फैमिली ऑफिस के क्षेत्र काम कर रही प्रमुख कंपनी फिनट्रस्ट एडवाइजर्स एलएलपी ने एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। कई स्टार्टअप फिनट्रस्ट के क्लाइंट हैं। मिलियनेयर अपने धन को मैनेज करने और निवेश के फैसले लेने के लिए किसी बाहरी एक्सपर्ट को नियुक्त करते हैं। इसे ही फैमिली ऑफिस कहा जाता है।
'देश में 50-60 सिंगल फैमिली ऑफिस हैं'
फिनट्रस्ट के को-फाउंडर और पार्टनर, अनुराग झंवर के मुताबिक फिलहाल देश में 50-60 सिंगल फैमिली ऑफिस हैं। 2024 तक इनकी संख्या 17 गुना बढ़कर 1,000 से अधिक हो जाने का अनुमान है। वहीं, दुनिया की बात करें तो 2008 में 1,000 फैमिली ऑफिस थे। 2019 तक इनकी संख्या 10 गुना बढ़कर 10,000 से अधिक हो गई। वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में फैमिली ऑफिस का कॉन्सेप्ट अभी शुरुआती स्तर पर है। भारत में एचएनआई और यूएचएनआई की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जैसे-जैसे लोग अमीर होंगे, फैमिली ऑफिस की जरूरत में भी इजाफा होगा। फिलहाल फिनट्रस्ट उन एचएनआई/यूएचएनआई को अपनी सेवाएं दे रही है जिनके पास 60 लाख डॉलर (करीब 42.6 करोड़ रुपए) से अधिक निवेश योग्य राशि है।
'फैमिली ऑफिस परिवार के जटिल कारोबारी ढांचे को मैनेज करेंगे'
एचएनआई/यूएचएनआई के बीच सोने या अचल संपत्ति में निवेश को लेकर रुचि कम रहेगी। वे जटिल फाइनेंशियल एसेट्स या नई पीढ़ी के बिजनेस में दांव लगाना चाहेंगे। वे न सिर्फ एंजल वे न सिर्फ एंजल इन्वेस्टर होंगे, बल्कि आंत्रप्रेन्योरियल वेंचर कैपिटलिस्ट और प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर भी होंगे। अनुराग झंवर के मुताबिक, सिंगल फैमिली ऑफिस के इस सेगमेंट मिड से लॉन्ग टर्म में तेजी से ग्रोथ दर्ज होगी। फैमिली ऑफिस की सेवाएं सिर्फ परिवार की संपत्ति को मैनेज करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टैक्स सलाह, उत्तराधिकार योजना, यहां तक कि परोपकार या किसी भी अन्य वित्तीय/गैर-वित्तीय सलाह के सेगमेंट भी फैलेगी। चूंकि, एक फैमिली ऑफिस को चलाने या इसकी सेवाएं लेने की लागत अधिक होती है, इसलिए मल्टी-क्लाइंट फैमिली ऑफिस का चलन बढ़ेगा। फैमिली ऑफिस परिवार के जटिल कारोबारी ढांचे को मैनेज करेंगे। वे उद्यमियों की संपत्ति को मैनेज करने के लिए जरूरत के मुताबिक लचीले मॉडल अपनाएंगे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2QKTJIT
via ATGNEWS.COM
Post a Comment
0 Comments