भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधारों का असर मामूली होगा: मूडीज

चेन्नई. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधारों के असर मामूली ही होंगे। मूडीज ने यह बात अपनी एक रिपोर्ट में कही है। एजेंसी ने कहा है कि पिछले दो साल से भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 4.5% ही रही है। पीएमआई इंडेक्स डेटा में तेजी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि अर्थव्यवस्था में स्थिरता आ गई है। मूडीज ने कहा है कि हालांकि मौजूदा तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं, लेकिन ग्रोथ रेट पहले के अनुमान से कम रहेगी।
अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए घरेलू मांग का बढ़ना बेहद जरूरी
मूडीज ने कहा है कि एजेंसी के अनुमान के मुताबिक 2020 में ग्रोथ रेट 5.4% और 2021 में ग्रोथ रेट 5.8% पर रहेगी, जबकि पहले यह अनुमान 6.6% और 6.7% का था। एजेंसी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए घरेलू मांग का बढ़ना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही क्रेडिट ग्रोथ भी जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनबीएफसी के साथ बैंकों से लोन मिलने में कमी आने से पिछले एक साल में क्रेडिट ग्रोथ पर काफी असर पड़ा है।
भारतीय बैंक रेट कम करने को इच्छुक नहीं
एजेंसी का कहना है कि आरबीआई द्वारा रेट में कटौती करने के बावजदू भारतीय बैंक न तो लोन देने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं और न ही लोन दरों को ज्यादा कम करने के इच्छुक हैं। इसके परिणामस्वरूप दिसंबर 2019 में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट ग्रोथ 7% पर रही जो एक साल पहले समान अवधि में 12.8% पर थी। कॉमर्शियल सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ की स्थिति और खराब है। दिसंबर 2019 में इंडस्ट्री की नॉमिनल क्रेडिट ग्रोथ 1.6% पर रही जबकि सर्विस सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ 6.2% रही और एग्रीकल्चर सेक्टर को क्रेडिट ग्रोथ 5.3% रही।


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पीएमआई इंडेक्स तेजी अर्थव्यवस्था में स्थिरता आने की ओर इशारा कर रही है


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