पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं, लॉकडाउन के दौरान पैनिक बाइंग की जरूरत नहीं
नई दिल्ली। लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं के साथ एलपीजी ( रसोई गैस ) की पैनिक बाइंग की खबरों के बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के चेयरमैन संजीव सिंह का बड़ा बयान आया है। आईओसी चेयरमैन ने कहा है कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एलपीजी का स्टॉक लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी बना रहेगा।
सभी ग्राहकों को अप्रैल तक आपूर्ति के लिए स्टॉक उपलब्ध
आईओसी चेयरमैन संजीव सिंह ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि हमारे पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का इतना स्टॉक उपलब्ध है कि पूरे अप्रैल प्रत्येक ग्राहकों को आपूर्ति के बाद भी यह खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से ग्राहकों को एलपीजी की पैनिक बाइंग करने की आवश्यकता नहीं है। हम खाली सिलेंडरों को 100 फीसदी रिफिल कर रहे हैं। आईओसी चेयरमैन ने कहा कि हमारे सभी एलपीजी बॉटलिंग प्लांट 130 फीसदी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। सभी बल्क स्टोरेज पॉइंट, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप, पेट्रोल पंप्स सामान्य तरीके से कार्य कर रहे हैं।
एलपीजी की मांग में 200 फीसदी की बढ़ोतरी
आईओसी चेयरमैन ने कहा कि कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन होने के बाद से एलपीजी की मांग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एलपीजी सिलेंडर की मांग में पिछले कुछ दिनों में 200 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है। सभी को रसोई गैस उपलब्ध कराने के इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं होटल, कैंटीन और शादियां टलने की वजह से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की मांग पांच फीसदी रह गई है।
किल्लत के डर से करा रहे रसोई गैस की बुकिंग
गैस एजेंसी से जुड़े लोगों का कहना है कि लॉकडाउन होने के बाद से उपभोक्ताओं में रसोई गैस की किल्लत का डर पैदा हो गया है। इसी कारण से उपभोक्ता रसोई गैस की ज्यादा बुकिंग करा रहे हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहारर से ज्यादा मांग आ रही है। जानकारों का कहना है कि सामान्य तौर पर रसोई गैस की इतनी मांग नहीं होती है।
पेट्रोल की मांग 8 फीसदी घटी
देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सभी प्रकार के कारोबार बंद पड़े हैं। फ्लाइट्स निलंबित चल रही हैं। ट्रेनों को रोक दिया है। इस कारण से वाहनों की आवागमन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। इससे पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की मांग पर असर पड़ा है और इसकी ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ा है। अधिकांश दोपहिया और कार सड़कों से गायब हैं। इस कारण मार्च में अब तक पेट्रोल की मांग में 8 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि डीजल की मांग 16 फीसदी कम हो गई है। एटीएफ की मांग में 20 फीसदी की कमी आई है।
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