मार्च में कमजोर रही भारत की विनिर्माण गतिविधियां, बिजनेस सेंटीमेंट निचले स्तर पर

कोरोना वायरस का असर देश की निर्माण गतिविधियों पर भी दिख रहा है। मार्च महीने में निर्माण गतिविधियों की वृद्धि दर पिछले चार महीनों में सबसे कम स्तर पर रही है। मार्केट इकोनॉमिक्स द्वारा गुरुवार को जारी आईएचएस मार्किट भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) घटकर 51.8 रह गया। फरवरी में पीएमआई 54.5 दर्ज किया गया था। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में तेजी और इससे कम रहना गिरावट दिखाता है। यह नवंबर 2019 के बाद से सबसे कम वृद्धि दर रही है।

यह लगातार 32वां महीना है, जिसमें विनिर्माण पीएमआई 50 अंक के ऊपर रही है जिसका अर्थ यह है कि विनिर्माण में विस्तार हो रहा है। आईएचएस मार्किट के अनुसार भारतीय विनिर्माण सेक्टर अभी भी वैश्विक कोरोना आउटब्रेक के नकारात्मक असर की तुलना में बचा हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार कोविड-19 की चिंताओं के कारण सकारात्मकता के साथ व्यापार के दृष्टिकोण के प्रति विश्वास कम हो गया है। हालांकि आनेवाले महीनों में उम्मीद है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र का ज्यादा नकारात्मक असर दिख सकता है।

सर्वेक्षण के अनुसार 12 महीने के कारोबारी दृष्टिकोण के प्रति मार्च में सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री एलिएट केर ने भारत के नवीनतम सर्वेक्षण परिणामों पर कहा कि नए ऑर्डर और आउटपुट दोनों कम दर से बढ़े हैं लेकिन यूरोप और एशिया के अन्य हिस्सों में माल उत्पादकों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक थे।

केर ने कहा कि परेशानी के सबसे प्रमुख संकेत नए निर्यात आदेशों और भविष्य की गतिविधि सूचकांकों से आए, जो क्रमशः वैश्विक मांग में गिरावट और घरेलू विश्वास में नरमी का संकेत देते हैं। भारतीय निर्माताओं को दिए गए नए ऑर्डर मार्च में धीमी गति से बढ़े, जबकि, नए निर्यात कारोबार में तेजी से गिरावट आई। सर्वेक्षण में कहा गया है, "वास्तव में, कोविड-19 महामारी के कारण व्यापक लॉकडाउन के बीच 2013 सितंबर के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में गिरावट सबसे तेज गिरावट थी।"



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India's March factory activity growth at 4-month low amid coronavirus spread


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