महामारी हमेशा के लिए बदल देगी हमारी आदतें; भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचेंगे लोग, ओटीटी प्लेटफार्म और डिजिटल पेमेंट अपनाएंगे

कोरोनावायरस संकट जहां एक तरफ वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है वहीं दूसरी तरफ यह हमारी इंसानियत का इम्तिहान ले रहा है। वैसे तो इंसान एक सामाजिक प्राणी है। लेकिन इन दिनों कोरोना से बचने के लिए इंसान अब सामाजिक दूरी अपना रहा है। इस महामारी ने हमारे रहन-सहन से लेकर खाने-पीने जैसी गतिविधियों को बदलकर रख दिया है। इसके चलते जहां एक तरफ हम अपनी सदियों पुरानी परंपरा नमस्कार को फिर से अपना रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ डिजिटली एडवांस भी हो रहे हैं। कुल मिलाकर महामारी के चलते हमारी सोशल हैबिट्स में बदलाव आ रहा है। आइए जानते हैं सोशल हैबिट्स में किस तरह से बदलाव हो रहा है-

नमस्कार की परंपरा फिर से शुरू

दुनियाभर में लोग कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिलाने से बच रहे हैं और भारतीय परंपरा में दूर से नमस्कार करने की परंपरा को अपना रहे हैं ताकि संक्रमण से बचा जा सके। इजराइल के प्रधानमंत्री समेत दुनियाभर के तमाम नेताओं ने नमस्कार करने की भारतीय परंपरा को अपनाने की नसीहत दी है। बता दें कि हमारी भारतीय संस्कृति में किसी भी बड़े या आदरणीय व्यक्ति से मिलने पर दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार या प्रणाम करने की परंपरा है। हालांकि बहुत से भारतीयों का मॉर्डन/ विदेशी कल्चर के प्रति झुकाव रहा है यही वजह है कि कुछ लोग नमस्कार की बजाय हाथ मिलाने और गले मिलने में ज्यादा यकीन करने लगे थे। सामान्य दौर में जब कोई बेचैन होता था या परेशान होता था तो उसे छूकर, थपथपाकर दिलासा दिया जाता था। मगर कोरोनावायरस के चलेत अब सामान्य नहीं रहा। यहां तक कि लोग अब किस करने से परहेज करने से लगे हैं। साथ ही सेक्स करने से भी डरते हैं। कुल मिलाकर कोरोनावायरस से हाईजीन के साथ हमारी सेक्सुअल हैबिट्स को भी बदलकर रख दिया है। बता दें कि यह दूसरा मौका है, जब सेक्सुअल हैबिट्स में बदलाव देखा गया है। इससे पहले एड्स की वजह से लोगों ने कंडोम का इस्तेमाल करना जरूरी कर दिया था।

वर्क कल्चर और वर्क प्लेस की व्यवस्था में हो सकता है बदलाव

कोरोनावायरस ने दुनियाभर की सभी कंपनियों के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉर्म होम करने पर मजबूर कर दिया। आज लाखों-करोड़ों कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं। इससे पहले तक कंपनियां दफ़्तर से ही काम करने को तरजीह देती थी। कंपनियों के मुताबिक, कर्मचारी घर से काम नहीं करते हैं हालांकि आज कंपनियों के इस सोच को महामारी ने बदल दी है। इन दिनों वे सभी कंपनियां घर से काम करने को तरजीह दे रही है जो कभी दफ्तर के अलावा अन्य तरीकों से काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। हालांकि आज घर से भी कर्मचारी सुव्यस्थित ढंग से काम कर रहे हैं। दुनिया की बड़ी एचआर (ह्यूमन रिसोर्स) फर्मों में से एक रैंडस्टैड इंडिया की चीफ़ पीपुल ऑफिसर अंजली रघुवंशी के मुताबिक, "पहले जो रोल्स पारंपरिक रूप से वर्क फ्रॉम होम नहीं होते थे, वो भी अब इस दायरे में आने लगे हैं। पहले जिन सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम नहीं था उनमें भी अब इसके लिए दरवाजे़ खुल रहे हैं। मतलब यह कि अब सेल्स वाले भी घर से काम कर रहे हैं। सेल्स के लोगों को कहा जा रहा है कि वे क्लाइंट्स के साथ वर्चुअल मीटिंग करें।"

वर्क प्लेस में मिलेगा जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा

वर्क फ्रॉर्म होम के दौरान जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा मिलेगा। नार्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथियास डोएपके के मुताबिक, वर्कप्लेस में महिलाओं और पुरुषों में काम और सैलरी के मामले में हमेशा भेदभाव देखा जाता रहा है। हालांकि वर्क फ्रॉर्म होम इस फासले को भी खत्म कर सकता है। वर्क फ्रॉर्म होम जेंडर समानता को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञ के मुताबिक, वर्क कल्चर में यह नीति लंबे समय तक काम करेगी।


ऑनलाइन शॉपिंग हैबिट्स में होगा इजाफा

अब ई-शॉपिंग सिर्फ कपड़े, जूते, ज्वेलरी, घड़ी जैसे सामान तक सीमित नहीं होगा, क्योंकि लोग मजबूरी में ही सही लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग को अपना रहे है, जिसका असर आने वाले सालों में दिखेगा। मतलब आने वाले वर्षों में ऑनलाइन शॉपिंग में इजाफ दर्ज किया जा सकता है। ग्रोसरी-फूड, दूध जैसी जरूरी सामान की ऑनलाइन शाॉपिंग में भारी बढोतरी दर्ज की जाएगी। न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के मामले इजाफा होने के बाद लोग मॉल और सुपरमार्केट जैसी जगहों पर जाने से परहेज कर रहे हैं। इसके बजाए लोग ऑनलाइन के जरिए घर पर ही सामान मंगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव के हवाले से कहा गया है कि कोरोनावायरस के मामले बढ़ने के बाद पिछले 15 दिनों में फ्लिपकार्ट, अमेजन, बिगबास्केट और ग्रोफर्स जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 15 दिनों में जिन सामानों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है उसमें ग्रॉसरी उत्पाद, सब्जी और घरों में रोजाना इस्तेमाल में आने वाले सामान की संख्या ज्यादा है। ऑनलाइन फूड ग्रॉसरी स्टोर बिगबास्केट के संस्थापक विपुल पारेख का कहना है कि पिछले महीने के मुकाबले इस महीने ऑर्डर की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है और हमारे पास ऑडर्स की संख्या 25 से 30 फीसदी बढ़ गई है।

भीड़भाड़ वाली जगहों को करेंगे इग्नोर

कोरोना वायरस के फैलने के बाद से लोग भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बच रहे हैं। खासतौर पर दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में लोगों में यह चिंता ज्यादा दिखती है। विशेषज्ञों की मानें तो अब लोग हमेशा के लिए भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से बचना चाहेंगे। साथ ही क्लब, शादी जैसे समारोह जहां हजारों की संख्या में भीड़ पहुंचती है, वहां भी जाने से लोग बचेंगे।

मॉल और सिनेमा घर जाने से बचेंगे

कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद ज्यादातर लोग मॉल जाने से भी बचना चाहेंगे। यहां तक कि सिनेमा घर जाकर मूवी देखने से ज्यादा ओटीटी प्लेटफार्म पर मूवी देखना पसंद करेंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली स्टूडेंट छवि कहती हैं, 'मैं इन दिनों ओटीटी प्लेफार्म पर मूवी देख रही हूं और मुझे यह सिनेमा हॉल जाकर मूवी देखने से ज्यादा कंफर्टेबल लग रहा है। मैं आगे भी इसी माध्यम से मूवी देखूंगी।'

ऑनलाइन होगी पढ़ाई

दुनियाभर में स्कूल्स और यूनिवर्सिटीज इस बात की कोशिश में हैं कि पढ़ाई के तरीके को बदला जाए। वर्चुअल क्लासेज का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। तमाम स्कूल, कॉलेज भी इस तरह की संभावनाएं खंगाल रहे हैं। ऐसे में फ्यूचर में छात्रों को क्लासरूम की बजाय वर्चुअल क्लासेज से जुड़ने की आदत डालनी पड़ सकती है।

डिजिटल भुगतान पर फोकस

कोरोना संक्रमण के भारत में भी मामले बढ़ते जा रहे हैं और इसकी वजह से लोगों में डर भी बढ़ रहा है। इसी डर की वजह से लोग अब फिजिकल करेंसी का कम इस्तेमाल कर रहे हैं और डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ रहा हैं। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्राहकों से कहा है कि जितना मुमकिन हो उतना डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं को इस्‍तेमाल करें।

खान-पान और हाइजीन की आदतों में होगा बदलाव

कोरोना ने साफ-सफाई और हाइजीन की अहमियत को साबित किया है। भारत में अभी तक हाइजीन के स्टैंडर्ड विकसित देशों जैसे नहीं हैं लेकिन, अब इनमें बदलाव आता दिख रहा है।
लोगों के खाने-पीने की आदतें भी इस वायरस के साथ बदलती दिख रही हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के नोएडा चैप्टर के हेड और रेस्टोरेंट देसी वाइब्स के डायरेक्टर वरुण खेरा के मुताबिक, "अब लोग क्वालिटी और हाइजीन वाले खाने को ही तरजीह देंगे। दूसरी ओर, रेस्टोरेंट्स और होटलों को भी अपने हाइजीन स्टैंडर्ड को ऊपर उठाना होगा।"



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