वाणिज्य मंत्रालय ने कार्बन ब्लैक पर एंटी डंपिंग ड्यूटी की अवधि 5 साल और बढ़ाने की सिफारिश की
वाणिज्य मंत्रालय ने रबर और टायर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कार्बन ब्लैक के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी की अवधि पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की है। यह कार्बन ब्लैक मुख्य रूप से चीन और रूस से आयात होता है। इस आयात से होने वाले घरेलू कारोबार के नुकसान की सुरक्षा के लिए मंत्रालय ने यह सिफारिश की है।
मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी हटाने से घरेलू कारोबार को नुकसान होगा
वाणिज्य मंत्रालय की इन्वेस्टिगेटिंग आर्म डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमिडीज (DGTR) ने एक नोटिफिकेशन में कहा है कि रबर उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कार्बन ब्लैक की डंपिंग के पुख्ता सबूत हैं। यदि मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी को हटा दिया जाता है तो इससे घरेलू कारोबार को नुकसान होगा। इसको देखते हुए DGTR ने कहा है कि चीन और रूस से होने वाले कार्बन ब्लैक के आयात पर पांच साल के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी और लगाई जाए।
चीन से आयात पर लगे 494 डॉलर प्रति टन की ड्यूटी
DGTR ने चीन और रूस से आयात होने वाले कार्बन ब्लैक पर अलग-अलग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, DGTR ने चीन से आयात पर 494 डॉलर प्रति टन और रूस से आयात पर 36.17 डॉलर प्रति टन की ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। हालांकि, ड्यूटी लगाने को लेकर अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय को लेना है। जांच में DGTR इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि यह दोनों देश भारतीय बाजार में डंप प्राइस कार्बन ब्लैक निर्यात कर रहे हैं। खासतौर पर एक्सपायरी डेट खत्म होने के बाद उत्पाद को डंप प्राइस पर निर्यात किया जा रहा है।
एसोसिएशन ने की थी एंटी-डंपिंग ड्यूटी को बरकरार रखने की मांग
घरेलू उत्पादकों की ओर से कार्बन ब्लैक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने DGTR के सामने आवेदन कर इन दोनों देशों से आयात होने वाले कार्बन ब्लैक पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी को बरकरार रखने की मांग की थी।
क्या होती है एंटी-डंपिंग ड्यूटी
अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में जब कोई देश या फर्म घरेलू बाजार से कम कीमत पर किसी उत्पाद का निर्यात करता है तो उसे डंपिंग कहा जाता है। इससे आयात किए जाने वाले देश में उत्पाद की कीमतों पर असर पड़ता है। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग फर्मों का मार्जिन और प्रॉफिट प्रभावित होता है। ग्लोबल ट्रेड नियमों के मुताबिक, घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए देशों को डंपिंग उत्पादों पर टैरिफ लगाने की अनुमति होती है।
जांच के बाद लगाई जाती है ड्यूटी
ग्लोबल ट्रेड नियमों के मुताबिक, डंपिंग उत्पादों पर एक न्यायिक बॉडी की ओर से जांच के बाद ही ड्यूटी लगाई जाती है। भारत में ऐसी जांच DGTR करती है। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की प्रणाली में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की अनुमति दी गई है। इस ड्यूटी को लगाने का मकसद फेयर ट्रेड प्रैक्टिस और घरेलू उत्पादों को समान अवसर प्रदान करना है।
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