ओपेक और रूस के बीच क्रूड ऑयल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति बनी, जनवरी से रोजाना 5 लाख बैरल की बढ़ोतरी होगी
तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और रूस के बीच तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति बन गई है। लंबी बातचीत के बाद रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी से रोजाना 5 लाख बैरल उत्पादन बढ़ाया जाएगा। कोरोनावायरस महामारी के कारण क्रूड ऑयल की मांग में काफी गिरावट आई है।
नवंबर में 11 डॉलर प्रति बैरल
नवंबर में ब्रेंट क्रूड के भाव में 11 डॉलर प्रति बैरल की तेजी दर्ज की गई है। 30 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 36.8 डॉलर प्रति बैरल पर था। 30 नवंबर को बढ़कर 47.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। इस साल 22 अप्रैल के निचले स्तर की तुलना में 32 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। कोविड 19 में लॉकडाउन के चलते मांग घटने से 22 अप्रैल को क्रूड 16 डॉलर के आस पास आ गया था।
कच्चे तेल की स्थिति में सुधार हो रहा है
बैंक आफ अमेरिका (BofA) की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 की वैक्सीन जल्द आने की उम्मीद में अब क्रूड मार्केट की कंडीशन में सुधार हो रहा है। वैक्सीन आने और कोरोना का डर कम होने से अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की उम्मीद है। इससे तेल की मांग में इजाफा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुलेगी, यात्रा भी शुरू हो जाएगी। इससे इंटरनेशनल स्तर पर क्रूड की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत में भी तेजी से इजाफा होगा। यह आगे 60 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकता है।
भारत को देनी पड़ सकती है ज्यादा कीमत
भारत अपनी जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में क्रूड लंबे समय तक महंगा बना रहा तो भारत को नई खेप के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी होगी। तेल के महंगा होने से कंपनियां पेट्रोल और डीजल के भाव बढ़ा सकती हैं। देश के कुछ राज्यों में पेट्रोल 90 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है।
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