बैंकिंग सेक्टर के हालात सुधारने के लिए बैड बैंक समेत अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार
आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज ने शुक्रवार को कहा कि देश के बैंकिंग सेक्टर के हालात सुधारने के लिए सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें बैड बैंक की स्थापना का विकल्प भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पब्लिक सेक्टर के बैंकों में पूंजी डाली है। आगे भी आवश्यकता के अनुसार पूंजी का निवेश किया जाएगा।
रि-कैपिटलाइजेशन के लिए सरकार के पास पैसा है
पब्लिक सेक्टर बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) का बोझ कम करने के लिए बैड बैंक की स्थापना के सवाल के जवाब में बजाज ने कहा कि हम विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इसमें यह विकल्प (बैड बैंक) भी शामिल है। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि हमने इस साल बड़े स्तर पर बैंकों में पूंजी का निवेश किया है। साथ ही रि-कैपिटलाइजेशन के वादे को पूरा करने के लिए हमने पैसा जमा कर रखा है।
बैड बैंक की स्थापना को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद
बैड बैंक की स्थापना को लेकर बैंकिंग सेक्टर के विशेषज्ञों में थोड़ा मतभेद है। इसी साल जून में मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा था कि बैंकिंग सेक्टर के NPA की समस्या को दूर करने के लिए बैड बैंक की स्थापना एक शक्तिशाली विकल्प नहीं है। सुब्रमण्यन ने कहा था कि जब कोई बैंक अपने बैड लोन की बिक्री कर देता है तो उसे उस राशि की कटौती करनी पड़ती है। उदाहरण के लिए- जब 100 रुपए बैड लोन में शामिल होते हैं तो इसकी रिकवरी से मिलने वाली वास्तविक राशि 100 रुपए से कम होती है। इस कारण कटौती करनी पड़ती है।
बैंकों के प्रॉफिट और लॉस पर असर पड़ेगा
केवी सुब्रमण्यन का कहना है कि जब एक बैंक अपने लोन को असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) या बैड बैंक को बेचेगा तो ऐसे मामलों में कटौती करनी पड़ेगी। इस कटौती से बैंक के प्रॉफिट और लॉस पर असर पड़ेगा। लोन की बिक्री को प्रभावित करने वाला यह एक प्रमुख कारण होगा। ऐसे में NPA की समस्या के लिए कोई विशेष समाधान निकलने तक बैड बैंक की स्थापना एक शक्तिशाली तरीका नहीं होगा। मौजूदा समय में बैंक RBI के नियमों के अनुसार अपने बैड लोन की बिक्री ARC को कर देते हैं।
बैड बैंक की स्थापना अच्छा आइडिया नहीं: उदय कोटक
इंडस्ट्री बॉडी CII के प्रेसीडेंट उदय कोटक का कहना है कि NPA की समस्या से निपटने के लिए बैड बैंक की स्थापना एक अच्छा आइडिया नहीं है। कोटक का कहना है कि इससे NPA से निपटने में पारदर्शिता नहीं रहेगी और रिकवरी रेट भी प्रभावित होगा। वहीं, RBI के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने बैड बैंक की वकालत की है। सुब्बाराव का कहना है कि मौजूदा हालातों में जब NPA गुब्बारे की तरह बढ़ रहा है, ऐसे में IBC फ्रेमवर्क से बाहर इसका समाधान निकालने के लिए बैड बैंक ज्यादा बेहतर विकल्प है।
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