साल भर पहले इन्हें लोग जानते तक नहीं थे, महामारी के कारण बिजनेस बढ़ा तो बन गए अरबपति
कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया में भले ही 18 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई हो और 2020 में ग्लोबल ग्रोथ रेट 5% गिरने का अंदेशा हो, इस महामारी के कारण कुछ लोग बिलियनेयर भी बन गए हैं। इनमें कुछ तो ऐसे भी हैं जिनके बारे में साल भर पहले तक कोई जानता तक नहीं था। फोर्ब्स के अनुसार हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े 11 देशों के 50 लोग 2020 में बिलियनेयर बने हैं। इनमें करीब तीन दर्जन चीन के हैं।
साइरस पूनावाला: सबसे तेजी से नेटवर्थ बढ़ने में 5वें नंबर पर

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। इसके चेयरमैन साइरस पूनावाला की नेटवर्थ 11.5 अरब डॉलर है, जो सालभर में लगभग दोगुनी हो गई। हुरून रिसर्च के अनुसार पिछले साल सबसे तेजी से नेटवर्थ बढ़ने के मामले में वे दुनिया में पांचवें नंबर पर थे और दुनिया के 86वें सबसे अमीर आदमी बन गए थे।
उगुर साहिन: सालभर में शेयर 160% बढ़े, नेटवर्थ 4.2 अरब डॉलर हुई
बायोएनटेक के सीईओ उगुर साहिन के बारे में सालभर पहले तक कम लोगों को ही पता था। बायोएनटेक ने फाइजर के साथ मिलकर वैक्सीन बनाई है जिसे अमेरिकी रेगुलेटर एफडीए ने 95% इफेक्टिव माना है। साहिन के पास कंपनी के 17% शेयर हैं और पिछले साल शेयर भाव 160% बढ़ गए। इससे उनकी नेटवर्थ 4.2 अरब डॉलर हो गई है।
स्टीफन बैंसेल: एक साल में शेयर भाव 550% बढ़ने का मिला फायदा
मॉडर्ना के सीईओ फ्रेंच मूल के स्टीफन बैंसेल की नेटवर्थ 4.1 अरब डॉलर हो गई है। उनके पास कंपनी के 6% शेयर हैं और शेयर भाव पिछले साल 550% बढ़े हैं। अमेरिकी रेगुलेटर ने फाइजर के बाद मॉडर्ना की वैक्सीन को ही मंजूरी दी है। मॉडर्ना के शुरुआती दिनों में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिमॉथी स्प्रिंगर और एमआईटी के साइंटिस्ट रॉबर्ट लैंगर ने भी पैसा लगाया था। वे भी अब बिलियनेयर बन गए हैं। स्प्रिंगर ने 2010 में 5 लाख डॉलर लगाए थे। अब उनकी 3.5% इक्विटी की वैल्यू 1.6 अरब डॉलर हो गई है। लैंगर एमआईटी में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। उन्होंने भी 2010 में ही मॉडर्ना में पैसा लगाया था। अभी उनकी होल्डिंग 3% है जिसकी वैल्यू 1.5 अरब डॉलर है।
प्रेमचंद गोधा: शेयर 90% बढ़ने से नेटवर्थ 1.4 अरब डॉलर हुई

ऐसा नहीं कि सिर्फ वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से जुड़े लोग ही बिलियनेयर बने हैं। इस कैटेगरी में पहले बात भारतीयों की करते हैं। प्रेमचंद गोधा की कंपनी इप्का लैब्स जेनरिक दवाएं बनाती है। लेकिन मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की अचानक बिक्री बढ़ने के कारण कंपनी के शेयर तेजी से बढ़ गए थे। एक साल में कंपनी के शेयर 90% से अधिक बढ़े हैं। इसका फायदा गोधा को हुआ और उनकी नेटवर्थ 1.4 अरब डॉलर हो गई। हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन को पहले कोविड-19 के इलाज में प्रभावी बताया गया था, लेकिन बाद में डब्लूएचओ ने कहा कि ऐसा नहीं है।
गिरधारी, बनवारी और राजेंद्र: 1.3 अरब डॉलर है इनकी नेटवर्थ
गिरधारी लाल बावरी, बनवारी लाल बावरी और राजेंद्र अग्रवाल, तीनों भाइयों की मैकलोड फार्मास्युटिकल्स भारत की टॉप 10 फार्मा कंपनियों में गिनी जाती है। हालांकि यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। कंपनी अस्थमा, डायबिटीज और ओस्टोपोरोसिस की जेनरिक दवा बनाती है। इस साल इन भाइयों की नेटवर्थ 1.3 अरब डॉलर हो गई है।
कार्ल हैनसेन: दिसंबर में ही कंपनी लिस्ट, नेटवर्थ 3 अरब डॉलर हो गई
कनाडा की कंपनी एबसेलेरा का बिजनेस एंटीबॉडी ट्रीटमेंट से जुड़ा है। 11 दिसंबर को कंपनी के शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुए थे। फाउंडर और सीईओ कार्ल हैनसेन की हिस्सेदारी कंपनी में 23% है। हालांकि लिस्टिंग के बाद शेयर प्राइस में गिरावट आई है, फिर भी हैनसेन की नेटवर्थ तीन अरब डॉलर हो गई है। हैनसेन 2019 तक ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे।
सर्जियो स्टीवानाटो: 40 कंपनियों को वायल बेचकर बने बिलियनेयर

वैक्सीन सप्लाई के लिए कांच के करोड़ों वायल्स की जरूरत पड़ रही है। इटली के सर्जियो स्टीवानाटो की कंपनी स्टीवानाटो ग्रुप जर्मनी की शॉट के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ग्लास वायल बनाने वाली कंपनी है। यह कोविड वैक्सीन बनाने में लगी 40 से अधिक कंपनियों को वायल बेच रही है। बिजनेस बढ़ने के कारण सर्जियो की नेटवर्थ 1.8 बिलियन डॉलर हो गई है।
अगस्त ट्रोएंडल: रिसर्च में बड़ी कंपनियों को मदद से बढ़ा बिजनेस
अमेरिकी कंपनी मेटपेस बड़ी दवा कंपनियों को रिसर्च में मदद करती है। पिछले साल इसके शेयर के दाम 70% बढ़ गए। इसलिए इसके फाउंडर और सीईओ अगस्त ट्रोएंडल की नेटवर्थ 1.3 अरब डॉलर से अधिक हो गई है।
हू कुन: 5 महीने में शेयर 150% बढ़े, नेटवर्थ 3.9 अरब डॉलर हुई

चाइनीज कंपनियों में सबसे प्रमुख हैं कॉन्टेक मेडिकल सिस्टम्स के चेयरमैन हू कुन। मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनी कॉन्टेक पिछले साल अगस्त में ही शेन्झेन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। उसके बाद इसके शेयर 150% चढ़ चुके हैं और हू कुन की नेटवर्थ 3.9 अरब डॉलर हो गई है।
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