यस बैंक के 15,000 करोड़ रुपए के एफपीओ के पहले बांड निवेशकों ने शुरू की लड़ाई, ज्यादा ब्याज पाने पर कोई आरोप नहीं लगाता-आरबीआई

एडिशनल टियर 1 (AT1) बांड के राइटडाउन के मुद्दे पर बांड निवेशकों और यस बैंक के बीच लड़ाई और तेज हो गई है। क्योंकि अब और ज्यादा निवेशक कानूनी हस्तक्षेप की मांग कर अपने पैसे वापस लेने को आगे आ गए हैं। उधर आरबीआई ने कहा है कि जब ज्यादा ब्याज लोग लेते हैं तब हम पर कोई आरोप नहीं लगाता है। बता दें कि यस बैंक का एफपीओ 15 जुलाई को खुल रहा है। बैंक इससे 15 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है।

एटी-1 बांड को किया गया था राइट डाउन

कई निवेशकों ने यस बैंक के रेस्क्यू प्लान के हिस्से के रूप में बांड के राइट डाउन के लिए आरबीआई के खिलाफ देश भर में मुकदमों की शुरुआत की है। इनमें से एक 63 मून्स टेक्नोलॉजीज है। पहले इसका नाम फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज था। एमसीएक्स के प्रमोटर्स जिग्नेश शाह द्वारा स्थापित इस कंपनी ने आरबीआई, आरबीआई द्वारा नियुक्त यस बैंक के प्रशासक और यस बैंक के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

आरबीआई ने जवाबी हलफनामा कोर्ट में दायर किया

अब आरबीआई ने 63 मून्स टेक्नोलॉजीज द्वारा याचिका के जवाब में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। काउंटर एफिडेविट में आरबीआई ने कड़े शब्दों का उपयोग किया है। इसने कहा है कि यस बैंक और एटी-1 बांड होल्डर्स के बीच हुए कांट्रैक्ट के प्रोविजन के आधार पर राइट ऑफ किया गया था। इसमें कोई गलत नहीं है। एटी-1 बांड को राइटिंग ऑफ करने का उद्देश्य यह था कि जिन सरकारी बैंकों ने इसमें पैसे लगाए थे वे सुरक्षित रहें। आरबीआई ने कहा है कि रिटेन ऑफ नोटीफाइड स्कीम को लागू करने के लिए होता है।

बैंक के बांड में लोगों को मिल रहा था ज्यादा ब्याज

आरबीआई ने एफिडेविट में कहा है कि यस बैंक में वित्तीय मुश्किलों से पहले किसी भी पिटीशनर ने कोई शिकायत नहीं कराई। क्योंकि तब वे लोग इसी एटी-1 बांड में ऊंची ब्याज दरों का फायदा ले रहे थे। आरबीआई ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि एक ओर आप ऊंची ब्याज दर लें और बाद में जब यह फेल हो जाए तो अपना फोकस आरबीआई पर कर दें। एटी 1 बांड्स को परपेच्युअल बांड्स भी कहा जाता है। यह टियर 1 बांड्स की तुलना में जोखिम वाला बांड होता है। निवेशक अक्सर ज्यादा ब्याज की लालच में इस बांड्स में निवेश करते हैं।

एक्सिस ट्रस्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर किया है पिटीशन

हाल में एक्सिस ट्रस्टी ने बाम्बे हाईकोर्ट में एक पिटीशन फाइल किया था। एक्सिस ट्रस्टी उन लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है जो यस बैंक के एटी-1 बांड धारक हैं और जिनको परपेच्युअल बांड्स के रिटेन डाउन से नुकसान हुआ है। इस पर कोर्ट ने इंटरिम ऑर्डर को 15 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया था। ऐसा आरोप लगाया गया है कि रिटेल एटी 1 बांड्स को सुपर एफडी के रूप में पेश किया गया था जिसमें सुरक्षा और ऊंचे ब्याज दर पर फोकस किया गया था। इस पर 9 से 9.5 प्रतिशत की दर से ब्याज का ऑफर था। हालांकि यस बैंक को बेल आउट किए जाने के बाद कुछ निवेशकों ने बैंक से संपर्क भी किया था।

बता दें कि यस बैंक के प्रमोटर राणा कपूर नियमों के खिलाफ लोन देने के कारण इस समय जेल में हैं। साथ ही ईडी भी उनकी जांच कर रहा है। उनकी अरबों रुपए की संपत्ति भी अटैच की गई है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, बांड धारकों ने इस बांड में करीबन 94 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया था।



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यस बैंक के बांड में निवेशकों ने करीबन 94 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया था


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