पोर्ट, सड़क और पावर प्रोजेक्ट की फंडिंग के लिए नया बैंक बनाने पर विचार कर रही है सरकार, बजट में हो सकती है घोषणा
केंद्र सरकार पोर्ट, सड़क और पावर प्रोजेक्ट की फंडिंग के लिए एक नया बैंक बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को मंदी की मार से बाहर निकालने के लिए इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 फरवरी को पेश होने वाले आगामी आम बजट में इस बैंक की घोषणा हो सकती है।
1 लाख करोड़ रुपए की इक्विटी कैपिटल से होगी शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक, इंफ्रा प्रोजेक्ट की फंडिंग के लिए बनाए जाने वाले इस बैंक की शुरुआत 1 लाख करोड़ रुपए की इक्विटी कैपिटल के साथ हो सकती है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों का कहना है कि 2000 करोड़ रुपए के कॉरपस वाले मौजूदा इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस का नए बैंक में विलय किया जाएगा।
शुरुआत में सरकार करेगी फंडिंग
सूत्रों के मुताबिक, इस बैंक की शुरुआत में फंडिंग सरकार की ओर से की जाएगी। बाद में निवेशकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इस बैंक का गठन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की तर्ज पर किया जा सकता है। इसके मुख्य निवेशकों में कनाड़ा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, एशियन डेवलपमेंट बैंक और अबु धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी शामिल हैं। इस प्रस्ताव पर कैबिनेट में विचार विमर्श के लिए वित्त मंत्रालय नोट बना रहा है। हालांकि, वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
प्रोडक्टिव असेट्स पर खर्च बढ़ाने की चुनौती का सामना कर रहा है देश
महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन से राहत देने के लिए पिछले साल सरकार ने गरीबों और किसानों को सीधे प्रोत्साहन पैकेज दिया था। इस कारण देश आर्थिक ग्रोथ को सहायता देने वाले प्रोडक्टिव असेट्स पर खर्च बढ़ाने की चुनौती का सामना कर रहा है। पिछले साल सिटीग्रुप के इकोनॉमिस्ट ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए सीधे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने की वकालत की थी।
इंफ्रा खर्च के लक्ष्य से चूक सकती है सरकार
केंद्र सरकार ने अगले पांच सालों में नई सड़क, रेल लिंक और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करीब 100 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य तय किया है। इसमें विदेशी निवेश की बड़ी हिस्सेदारी शामिल है। लेकिन सार्वजनिक वित्त के बिगड़ने के कारण सरकार इस लक्ष्य को पाने से चूक सकती है। सरकार ने बीते 2 सालों में मार्च 2020 तक पब्लिक सेक्टर के बैंकों में 1.7 लाख करोड़ रुपए डाले हैं। लेकिन बजट डेफिसिट बढ़ने और कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ ने चालू वित्त वर्ष में बैंकों में पूंजी डालने पर ब्रेक लगा दिया है।
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